रेत सी जिन्दगीं ।

कितना भी संभालो इसे ,
कुछ ना कुछ रुठ ही जाती है ।
रेत सी ही तो है , ये ज़िन्दगी ,
कितना भी पकड़ो मुट्ठी में,
फिसल कर छूट ही जाती है ।

बहती धाराओं सी निरन्तर,
आगे बढ़ती है ज़िन्दगी
यूं ही चलती चली जाती है…..
किसी के लिए ना रुकती है ज़िन्दगी ।

गर साथ चलो इसके ,
तो आसान सफर है ज़िन्दगी ।
हम मुसाफ़िर है इसके ,
हमारे मंजिलों की डगर है ज़िन्दगी ।

कोयल की कूक सी ,
मधुर संगीत है ज़िन्दगी ।
गर अपने ‌दिल की सुनो ,
तो सच्ची मीत है ज़िन्दगी ।

मंजिल इक है ,
रास्ते अनेक है ।
इंसान अलग-अलग,
पर मानवता एक है ।
ये समझ जाए सब,
तो कितनी आसान है ज़िन्दगी ।

प्यार हम में भी है ,
प्यार उनमें भी है ।
प्यार का ही दूसरा नाम है ज़िन्दगी ।
गर दिल हो सच्चा ,
ईमान हो पक्का
तो जन्नत से कुछ कम नहीं है, ये ज़िन्दगी ।

2019-2020 © AnuRag

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