||वक़्त ||

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वक़्त कुछ खुद भी बदला है,
कुछ, वक़्त ने बदल दिया है ।
कुछ, हम खुद से बदले हैं,
बाकी जमाने ने बदल दिया है ।
अब क्या शिकायत !!!
कि वक़्त बदला है,या हम बदले हैं ?
बदलाव प्रकृति का नियम है,
वक़्त हमारे साथ बदला है,
हम वक़्त के साथ बदले है।।

©AnuRag

Easy$och#6

pc: lifetomake

We all know life is beautiful.
When all things are going good and it’s happening according to our plan.
But do you ever thought what is beautiful about when you’re going through worst phase of your life??
Almost everything going bad.You got stuck at a point in life. Life seems meaningless.
Everything seems bullerd. You find yourself alone in the journey of life.

This is the phase of life which actually teaches, who you are.Who are your real ones in this fake world.You come to know who really cares for you.
This is the real beauty of bad phase of life.

In this phase you gonna realize that what you really want from your life,and what makes you happy.We come to know our weaknesses and strengths.This is the phase which makes you stronger than you are. If you’re able to smile in this phase of life,then believe me you’re going to be best version of yourself.

Stay motivated.

Stay happy.

~AnuRag

सुबह-शाम….

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इक सुबह ,इक शाम,
फिर इक सुबह,इक और शाम हुई ।
आने वाले पलों की आस में,
गुजरे पलों की काश में ,
दिन-ब-दिन,हर दिन
बस यूं ही जिन्दगी तमाम हुई ।।

© AnuRag

अजनबी…

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कुछ शिकायतें मेरी भी है तुझसे,
तेरे पास भी मेरी खामियों की,
अनगिनत लिस्ट जरूर होगी ।
शायद इनमें से, कुछ गलतफहमियां मेरी,
कुछ ना कुछ तेरी भी तो होगी ।
ये गमों का बोझ कहीं ना कहीं ,
दोनो के दिलो में दफन ‌है ।
जो वक्त वे वक्त मौसम की तन्हाइयों के साथ ,
उभर ही आता है ।
जिसका जिक्र हम‌ अजनबियों के साथ करते हैं
क्यूं ना हम दोनों अजनबी बनकर ,
कुछ देर साथ बैठकर कुछ मेरी ‌गलतियों,
कुछ तेरी भी गलतफहमियों का जिक्र करे ।
शायद इन सिलसिलों के बाद,
हम अजनबी बनकर भी ,
फिर से अजनबी ना रहे ।

In every relationship with time many differences comes. It is quite natural. As no one is perfect . Generally Mistakes not ends the relationship ,it is the communication gap which makes the relationship wrost.

©AnuRag

बारिश और तुम

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जब भी मौसम करवट लेता है ।
ये घने काले बादल, शीतल तेज हवाएं,
कभी हल्की बारिश की फुहारें,
कभी घनघोर तूफानी तेज बारिश,
ना जाने क्या रिश्ता है इनका ,
तेरी यादों के साथ,
दोनों ही,बेचैन करके भी ,
दिल को इक चैन दे जाते हैं ।


ये उमड़ते काले घनघोर बादल,
जैसे किसी मंजिल की तरफ तेजी से‌ बढ़ते हुए,
तेरा, मेरे शहर से गुजरने का आभास कराते हैं ।
और कभी कभी यही बारिश की बूंदे बनकर ,
मेरे तन मन को भिगोकर,
तेरी जुल्फों की घनी छांव की तरह,
दिल को ठंडक का अहसास कराते हैं ।
बारिश की फुहारों को समेटे ये ठंडी हवाएं,
कभी मध्यम लय में, कभी तेज बहती हुई,
मेरे तन मन को, तेरे कोमल स्पर्श का अनुभव कराती है ।


जब भी मौसम का रुख बदलता ‌है।
प्रकृति की ये हलचले ,
तेरी मासूम हरकतों को खुद में दिखाती है ।
ऐसे में मेरा हृदय एकदम शून्य हो जाता है ,
जेहन में चल रहे सभी अन्तरर्दन्दं,
तेरे होने के आहट मात्र से ही विलीन हो जाता है ।
इस तरह मैं तुझ में, खुद में, इन फिजाओ में खो सा जाता हूं ।
और जब मैं इस ख्वाब से उठता हूं,
फिर साफ शांत मौसम में,
सूरज की सुनहरी चमकीली किरनो के बीच ,
हमेशा की तरह, तू उनमे मुस्कुराती हुई नजर आती है ।

©AnuRag

हसरतें !!!

दिल तो बस एक है ,
पर इसकी हसरतें अनेक है ।
इन हसरतों में कुछ पूरी होकर ,
जिन्दगीं का अटूट हिस्सा बन जाती है ।
अधिकतर हसरतें अधूरी रहकर भी ,
जिन्दगीं जीने की,खूबसूरत वजह बन जाती है ।

©AnuRag

खूबसूरत !!!

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खूबसूरत तो तू आज भी बहोत है ।
सच कहूं तो बाहरी दुनिया की नजरों में पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गयी है।
पहले और आज में फर्क, बस इतना सा है ,
पहले इस खूबसूरती के पीछे इक‌ खूबसूरत दिल भी था ।।।

~Anurag

भूख !!!

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दोनों ही भूखें थे ।
इक आलीशान घरों में रहता था ।
दूसरे का, सड़कों पर ही आशियाना था ।
इक भूखा था …..
थोड़ा और पाने के लिए ।
दूसरा भूखा था ….
बस थोड़ा सा खाने के लिए ।।।

~Anurag

Covid -19 Crisis

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१.क्या लोगों की जिंदगियों से ज्यादा चुनाव जरुरी है ?
२.क्या इस महामारी की स्थिति में ग्राम प्राधान थोड़ा देर से बनते तो गांव का विकास रुक जाता ?
३.क्या चुनावी रैलियों से कोरोना डरता है ?
४.क्या कुंभ मेले में इतनी भीड़ से लोगों को ना जाने दिया जाता तो भक्तो से भगवन रुठ जाते ?
५. क्या इस  समय किसी तरह चुनाव सम्पन्न कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ?
६.क्या सरकार को निःशुल्क वैक्सीनेशन नहीं करना चाहिए ? कुछ लोग ऐसे भी ‌है जो इस न्यूनतम मूल्य को भी नहीं भर सकते ।
७.क्या पिछली बार से सीखकर सरकार को  भविष्य में आने वाले  महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ व्यवस्था सुदृढ़ नहीं करना चाहिए था ?

सोचनीय है । इक बार जरूर सोचें ।
और इस महामारी में अगर आप किसी की मदद कर सकते हैं तो जरूर करें ।
एक‌ दूसरे का सहयोग करके ही हम इस मुश्किल घड़ी का सामना कर सकते हैं ।
अपना ध्यान रखें ‌। घर में रहे । सुरक्षित रहे ।

~Anurag

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