हसरतें !!!

दिल तो बस एक है ,
पर इसकी हसरतें अनेक है ।
इन हसरतों में कुछ पूरी होकर ,
जिन्दगीं का अटूट हिस्सा बन जाती है ।
अधिकतर हसरतें अधूरी रहकर भी ,
जिन्दगीं जीने की,खूबसूरत वजह बन जाती है ।

©AnuRag

खूबसूरत !!!

pc: template.net

खूबसूरत तो तू आज भी बहोत है ।
सच कहूं तो बाहरी दुनिया की नजरों में पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गयी है।
पहले और आज में फर्क, बस इतना सा है ,
पहले इस खूबसूरती के पीछे इक‌ खूबसूरत दिल भी था ।।।

~Anurag

भूख !!!

pc: Google

दोनों ही भूखें थे ।
इक आलीशान घरों में रहता था ।
दूसरे का, सड़कों पर ही आशियाना था ।
इक भूखा था …..
थोड़ा और पाने के लिए ।
दूसरा भूखा था ….
बस थोड़ा सा खाने के लिए ।।।

~Anurag

Covid -19 Crisis

pc: Google

१.क्या लोगों की जिंदगियों से ज्यादा चुनाव जरुरी है ?
२.क्या इस महामारी की स्थिति में ग्राम प्राधान थोड़ा देर से बनते तो गांव का विकास रुक जाता ?
३.क्या चुनावी रैलियों से कोरोना डरता है ?
४.क्या कुंभ मेले में इतनी भीड़ से लोगों को ना जाने दिया जाता तो भक्तो से भगवन रुठ जाते ?
५. क्या इस  समय किसी तरह चुनाव सम्पन्न कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ?
६.क्या सरकार को निःशुल्क वैक्सीनेशन नहीं करना चाहिए ? कुछ लोग ऐसे भी ‌है जो इस न्यूनतम मूल्य को भी नहीं भर सकते ।
७.क्या पिछली बार से सीखकर सरकार को  भविष्य में आने वाले  महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ व्यवस्था सुदृढ़ नहीं करना चाहिए था ?

सोचनीय है । इक बार जरूर सोचें ।
और इस महामारी में अगर आप किसी की मदद कर सकते हैं तो जरूर करें ।
एक‌ दूसरे का सहयोग करके ही हम इस मुश्किल घड़ी का सामना कर सकते हैं ।
अपना ध्यान रखें ‌। घर में रहे । सुरक्षित रहे ।

~Anurag

दस्तूर-ए-जिन्दगीं !

pc:Dreamstime.com

हर डगर , हर मोड़ की,
दिल में इक निशानी रह गयी ।
चलते-चलते इन राहों में ,
बस यूं ही चलते-चलते…….
ना जाने कब बचपन से जवानी गयी।

मिले कई हमसफ़र इन राहों में ,
कुछ अफसाने बने, कुछ कहानी बन गयी ।
मंजिलें भी करीब थी ,
दिल में भी इक ख़ुमारी थी …….

पर दस्तूर-ए-जिन्दगीं, ख़बर किसको…
फासले कुछ कदम‌ ही थे मंजिलों से,
इक मोड़ कुछ यूं आया,ज़िन्दगी के सफ़र में,
 की ताउम्र चाहत जिसकी,
अब वो मंजिलें परायी हो गयी ।
समझते रहे जिन रास्तों को हम, दर्द का जरिया,
वहीं मेरे हर दर्द में, हमदर्द निकले ।

आने वाले कल की अब फिकर नहीं,
मंजिलों की ख्वाहिश ‌भी गयी ।
वक़्त का मंजर कुछ यूं बदला कि,
अब ये रास्ते ही मेरी मंजिल है,
इन रास्तों से ही आशिकी हो गयी ।।।

© AnuRag

आगोश में तू मेरी !

Pc: thelist

तेरे लबो के मिलन से,
मेरे लबो पे इक प्यास बाकी रह गयी ।
असर कुछ यूं हुआ तेरे लबो का ,
मेरे लबो पे अब भी ,
तेरे नर्म होंठों की मिठास बाकी रह गयी ।

तेरा वो कोमल स्पर्श,
संगमरमर सा तराशा बदन,
बाहों में तू मेरी,
ना रही कोई दूरी,
यूं नजदीकियों के सिलसिलों ‌मे,
तेरी सांसों की, मेरी सांसों में,
कुछ अनकहे अहसास बाकी रह गये।

तेरे हाथों का मेरे हाथों में,
अंगुलियों का यूं आलिंगन,
चलते रहे हम दूर तलक,
साथ हमारे ये आसमां ये फलक ।
इश्क का असर था कुछ ऐसा,
कि मेरे हाथों में तेरे,
हाथों की लकीरों के,
अब भी कुछ निशान बाकी रह गये ।

आगोश में तू‌ मेरी
यूं ही गुजरी रात पूरी,
काश ना होती सुबह इतनी जल्दी,
दिल के ना जाने कितने अरमान बाकी रह गये ।

© AnuRag

Camera !!!

Pc:Btitannica

पहले कैमरे की क्वालिटी अच्छी नहीं थी,
कोई फिल्टर भी नहीं थे ।
फिर भी तस्वीर में लोगों के चेहरे पर इक चमक होती थी।
इक रियलिस्टिक मुस्कान, इक सुकुन का भाव नजर आता था ।
आजकल दिन ब दिन कैमरे बेहतर होते जा रहे हैं।
पर लोगों के चेहरे बेरंग होते जा रहे हैं ।

सुकुन चैन की तो यहां बात ही नहीं है ,जनाब !!!
अब तो रियलिटी को भी कई फिल्टरों और एडिटिंग से गुजरना पड़ता है, महज एक तस्वीर का रुप लेने के लिए ।।

© AnuRag

English translation

First the quality of the camera was not good,
There were no filters either.
Even then, there was a glow on people’s faces in the picture.
A realistic smile and naturalness could be easily seen on their faces.
These days, cameras are getting better day by day.
But people’s faces are becoming colorless.

There is no talk of realistic smile and naturalness here, sir !!!
Now, even reality has to undergo many filters and editing, just to take the form of, a picture.

Heart or Mind !!!

Pc:123RF

बेशक, प्यार होने के लिए इक खूबसूरत दिल ही काफी है ।
पर उस प्यार को निभाने के लिए दिल और दिमाग (समझदारी) दोनों की जरूरत पड़ती है ।

Of course, a beautiful heart is enough to love.
But to fulfill that love requires both heart and mind (understanding)
.

©AnuRag

इक तू ही तो है !

कहता है ये जहां ,
कि प्यार बस इक बार होता है ।
जब भी‌ मिलता हूं मैं तुझसे,
मुझे तो हर बार होता है ।

कुछ नयापन, कुछ अनकहा ,
हर बार अलग अहसास होता है ।
ना हो सके बयां जो लफ्जों में,
आंखों में इश्क का वो जाम होता है।

तेरी जुल्फों के छांव तले ,
इस दिल को बड़ा आराम होता है ।
कभी तू गुस्से में भी हो,
उसमें भी इक प्यारा अन्दाज होता है ।

फिरता रहूं मैं कहीं भी, कभी भी,
हरदम तेरा ही ख्याल होता है।
ढूंढता है ये दिल तुझे जमाने की भीड़ में,
नादान है , इसे खबर नहीं,
इक तू ही तो है जो….
मेरी तन्हाईयों में भी मेरे साथ होता है ।

~AnuRag

इज़हार !

Pc: medium.com

था इश्क उनको भी ,
इज़हार हम ही करते रहे,
हमें पता भी न चला,
यूं खामोशी से ,वो प्यार करते रहे
।।

~AnuRag

Create your website with WordPress.com
Get started
%d bloggers like this: